गुब्बारा

विवेक मिश्र

गुब्बारा
(19)
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प्रदीप
सजीव चित्रण
सिद्धार्थ
लेखन शैली कमाल। कहानी की गति, उम्दा। वर्तनी की गलतियां न के बराबर (सिर्फ एक, जिससे की जगह जिसस) भाषा शैली आसानी से समझ आने वाली और उपयोगी। अंत निराशावादी होते हुए भी संतुष्टिपूर्ण। इसमें चार या पांच तारे देने का ही चुनाव है वर्ना मैं साढ़े चार तारे देता।
Shatrusudan
behtareen kahanee
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बी के
ati sunder
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Peetambara
different and new story. refreshing
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Suhel
jhakjhor diya mujhe... ik hi pal me... saare gunaah yaad aa gye mere...
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विजेता
Speechless.....एक एक दृश्य को विस्तार दिया है..मृत्यु का रोंगटे खड़े कर देने वाला चित्रण...
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Rashmi
very heart touching
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