Vishnu Jaipuria
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

न ही विद्या न ही बाहुबल न ख़र्चन को दाम, मो सम पतित अपंग के बस एक ही भगवान। लिखने का शौक है, पर ज्ञान नही फिर भी प्रतिलिपि ने बिना भेदभाव के मुझे अपने विशाल मंच पर उसी कतार में खड़ा किया है, जंहा सब नम्बर एक है। मै नवाबों के शहर लखनऊ से हूँ, सरलता से अपना नाता कोई और मुझे न भाता।।


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