Vidya Sharma
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

जीवन के हर पल को अपना मान कर जीती हूं फिर चाहे अच्छे हो या बुरे । लेखन मेरी आत्मा में बस चुका है । माता पिता का शुक्रिया जो उन्होंने मुझे यह अनमोल जीवन दिया और प्रतिलिपि का शुक्रिया जिसने मेरे भावों को व्यक्त करने के लिए मंच दिया और मुझे खुद से मिलवाया


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