Sunny Kansykar
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हम माफ़ी चाहते है, इस रचनाकार के अकाउंट में अभी तक कोई प्रकाशन कार्य नहीं हुआ है |
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

रंज़िशों के सफ़र में रह रहे हैं । इक टूटे हुए घर में रह रहे हैं ।। तुझसे दूर चले तो आए हैं,मग़र । अब तक तेरे असर में रह रहे हैं ।।


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