SHAILENDRA DUBEY
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

●●●●●दौड़ती भागती जिंदगी और इस भागमभाग में लहलुहान होकर बिखरती संवेदनाएं। इन्ही संवेदनाओं को समय समय पर समेटने की कोशिश और अपना शब्द देने का एक प्रयास ।आपकी प्रतिक्रिया की अपेक्षा के साथ।.....................(" शब्द बिखरे थे, समेटा तो कुछ कविताएं कुछ कहानियां थी"।.......✍️🤔) _____________________________________________________


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