राम किशन
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

बात वो नहीं जो अल्फ़ाज़ो में बयां हो, ख़ामोशी भी कह देती है ग़र सुनो लिखना मेरा शौक नहीं है. परन्तु जब भी कोई भाव आंदोलित होता है तो वह कभी शायरी, दोहे अथवा कहानी के रुप में प्रदर्शित हो जातें हैं. सीख रहा हूं और प्रयास जारी है.


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