Pranshu Verma
प्रकाशित साहित्य
48
पाठक संख्या
13,387
पसंद संख्या
0

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

संवाद जब नहीं होते तब भी होते हैं शब्द ।। मुझे यहां भी पढ़ें 📲 मेरी कलम से नामक फेसबुक पेज मुझे ब्लॉग पर भी फॉलो कीजिए - https://www.newpostpranshunets.blogspot.com अभिरुचि : सामाजिक चेतना के लिए कार्य दर्शन साहित्य व मानविकी कविता संग्रह - दीप मृत्यु काव्य खंड - खोया एक रास्ता उपन्यास - सुनहरी जंजीर इसके अतिरिक्त अनेक दार्शनिक लेख व कहानियां वाणिज्य व कंप्यूटर विद्यार्थी । सामाजिक व मानव व्यवहार के विस्लेषण का उन्नत व सटीक अध्ययन कर पाने की चेष्टा व उन उदगारों को लेखनी से अभिव्यक्त करने का प्रयास । जिन्हे मुंह से बोलना दुसह है । ज्ञान की खोज संपर्क - pranshunet@Gmail.com दूरभाष - 8707049310 लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश, 262802


Mohanbhai Anand ""આનંદ""

355 फ़ॉलोअर्स

Milan Rajput "Musafir"

260 फ़ॉलोअर्स

ऋषिनाथ झा

414 फ़ॉलोअर्स

n Mesurani "નિધી"

208 फ़ॉलोअर्स

Asha Gupta

0 फ़ॉलोअर्स
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.