Neeha Bhasin
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

मेरा नाम रचना तो नहीं है पर रचना तो मै हूँ ही मेरा नाम सपना होना चाहिए था पर मैं तो वास्तविकता हूँ, पर जिन लोगों को सब कुछ ठीक से पता है वो कहते हैं कि कुछ भी वास्तविक नहीं, तो फिर? अब ये भी नहीं हो सकता कि स्वयं को खोजने निकल जाऊँ, अब तो न जंगल बचे न पहाड़, रिज़ॉर्ट हैं वहाँ जाने से तो सिर्फ़ बैंक बैलेंस ही बिगड़े गा, रहने ही देते हैं क्या फर्क पड़ता है, यदि मै रचना हूँ तो उसमें विराम नहीं अगर सपना हूँ तो उसकी सुबह तो होने से रही, बस यही हूँ मै,


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