Kumar Krishna Mohan
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

न हारा हूं न हारूगां ।। कभी ना हार मानूंगा ।। चलेगी सांस फिर जब तक । तिरंगे को सवांरूगा ।।


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