Jyoti Mishra
प्रकाशित साहित्य
-2
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

"कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमाँ हमारा" मुझे लगता है कि इकबाल साहब की ये पंक्तियाँ मेरी जिंदगी को बखूबी बयां करती हैं / हालांकि मैं कोई लेखिका नहीं हूँ, बस स्वयं के सुकून और अनकहे एहसासों को बयां करने के लिए कागज और कलम की सहायता लेती हूँ / प्रतिलिपि पर प्रकाशित मेरी सभी रचनाएँ स्वरचित हैं /तथा सर्वाधिकार मेरे पास सुरक्षित हैं //


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