Jitendra Moslapuriya
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

भलाई सबकी करो, स्वार्थ को कभी आगे बढ़ने मत दो। वरना तो ज़िंदगी ही स्वार्थ बन जाएगी।मेरा उद्देश्य सबके चेहरे पर मुस्कराहट लाना है न कि किसी का दिल दुखाना ,मेरी सारी रचनाए स्वरचित है


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