Jayprakash Pawar 'The Stranger'
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

दास्तां-ए-जिंदगानी से चंद लम्हे गुजर गए, कुछ मीठी और कुछ कड़वी यादें छोड़ गए। बचे हुए लम्हे भी यूँ हँसते-रोते गुजर जाएँगे, फिर औरों की तरह एक दास्तां बन जाएँगे। कुछ पाने का ख्वाब नहीं हैं आरजू हैं इतनी, आएँ थे हम रोते हुए मगर हँसते हुए जाएँगे। I am not a professional writer or author. I write only for convey to my views.


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