Dev Lal Gurjar
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-12
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परिचय  

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सारांश:

प्रेम की परिभाषा से खेलता यह विचलती मन किसी अथाह सागर की लहरों में गमन करता यह परिंदा अनजान बसेरा किसी देश के कोनें में रहता यह प्रेमी यायावरी की चाल में चलता किसी मुसाफ़िर की तरह किसी रहनशाला में देखता जीवन किसी जीवन की सौम्य में!


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