Anjali Mishra
प्रकाशित साहित्य
6
पाठक संख्या
23,662
पसंद संख्या
0

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

जिंदगी एक किताब की तरह है, जिसके अंतिम पन्ने को विधाता ने लिख कर भेजा है, बाकी के पन्नों पर शब्द खुद ही उकेरने होते हैं।उन शब्दों को उकेरने का प्रयास सतत करना चाहिए।


दिनेश दिवाकर "Starnger"

3,456 फ़ॉलोअर्स

प्रतिलिपि हिंदी

2,577 फ़ॉलोअर्स

mukesh nagar

1,809 फ़ॉलोअर्स

तरुणा डहरवाल

1,612 फ़ॉलोअर्स

Mona Jain

0 फ़ॉलोअर्स

Aakash Deep

573 फ़ॉलोअर्स
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.