शिल्पी रस्तोगी
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

कभी कही तो कभी अनकही, कुछ कसक तो कुछ बेबसी, थोड़ी खुशियां थोड़े गम, कुछ अपना है तो कुछ पराया दर्द....कभी अनकहा अनूठा सा प्यार तो कभी अधूरे पन की कसक...यहीं सब मिलकर बनते हैं कुछ अनकहे एहसास ....


Santosh Unde

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