वेदिका ®
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

स्थान:     झाँसी

सारांश:

जब दिल और दिमाग में शोर होने लगता है तो शब्दों के जरिये दर्द हल्का करती हूँ,,, घुमा फिरा के नहीं सीधी सच्ची सटीक बात करती हूं,,,, 💁मिजाज हमारा कुछ-कुछ है समुंद्र के पानी जैसा..... खारी हूँ मगर खरी हूँ,,,,,😊😊


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