लता शर्मा "सखी"
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

मुझे छुट्टी दे दो कुछ दिन के लिए, अब तेरी बेरुखियाँ बर्दास्त नहीं होती, कुछ दिन न मुझे याद करना, न मुझको ही तुम याद आना। मेरे सपनों से भी कुछ दिन को अपना वास्ता तोड़ जाना। जो कभी मिल जाऊँ, या फिर, कभी तेरी राह में दिख जाऊँ। यूँ मुह मोड़ लेना जैसे, अजनबी हूँ तुम्हारे लिए। सब भूल जाना मुझे भी, कुछ दिन मेरे लिए। ©सखी


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