मीना मल्लवरपु
प्रकाशित साहित्य
181
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

हर ज़िंदगी एक कविता है जिसमें जीवन ने हज़ारों मंजुल रंग भरे हैं परंतु साथ ही एक अनलिखित शर्त भी रखी है कि इन कविताओं की थाह वही पा सकता हैं जो संवेदनशील हो,जो समानभूति से ओतप्रोत हो - यही मेरा अटल विश्वास सदैव रहा है। ज़िन्दगी को समझने की,उसकी थाह पाने का मेरा प्रयास और कविताओं के रूप में उन भावनाओं की अभिव्यक्ति मेरे लिए अत्यन्त मायने रखती है। हौसले ' मेरा प्रथम काव्य संकलन मेरी अभिव्यक्ति का माध्यम है।अब तक एक झिझक और संकोच मुझे पाठकों तक पहुंचने न दे रहे थे परन्तु आज हौसले आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं! ,आज़ादी अंतराल, बहते लहू की शिकायत ,समानभूति और रास्तों के अंधेरे, 'हौसले' का हिस्सा न होते हुए भी मेरे हौसलों का अभिन्न अंग हैं। आशा। है कि पाठकों की पसन्द पर खरी उतरेंगी।


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