मिनाक्षी मिश्रा -एहसासनामा
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परिचय  

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सारांश:

मुसाफ़िर........ अंतहीन सफ़र का मुझे जानने की कोशिश न करना, खुद को भूल जाओगे मेरी गुमनाम शख़्शियत में।। खुद से अनजान हूँ पर चेहरे पहचानती हूँ लफ़्ज़ों में लिपटी शख़्शियत को जानती हूँ। । मेरे रास्ते के देवदारों वादा है तुमसे एक दिन दरिया तुमसे होकर गुज़रेगी


डॉ सापेक्ष गौतम

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