मंजुल भटनागर
प्रकाशित साहित्य
20
पाठक संख्या
1,543
पसंद संख्या
74

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

नाम -श्रीमती मंजुल भटनागर . अध्यापन क्षेत्र से जुडी रही हूँ। आर्मी परिवार से  हूँ ,इसी कारण देश के सभी बड़े छोटे शहर और गाँवों में रहने का मौका मिला। जहां एक ओर पंजाब की उमंग और खेत मन मोहते हैं ,वहीँ सिक्कम की कंचनजंघा से निकलती तीस्ता नदी ,और पहाड़ों की खूबसूरती मन मोह लेती है। एक तरफ कोणार्क टेम्पल और नीला स्वच्छ समुन्द्र और दूसरी ,और माया नगरी का विशाल समुन्द्र। इन सभी अनुभव को बटोर कर जो व्यक्तित्व बना उसमे पूरा हिन्दुस्तान समाया हुआ है.  १. मेरी रचनाएँ लेख ,कहानी ,कवितायेँ इन पत्रिकाओं में शामिल हुए - सारथ ,  अभिव्यक्ति , अनुभूति , नव्या, प्रवक्ता ,उदन्ती, हाइकू कोष ,हिन्दी-पुष्प ,प्रयास आगमन ,सृजन ,कविमन,सहज साहित्य ,वृत्त मित्र, लेखनियाँ, परिकल्पना ,साहित्य रागिनी शब्द व्यंजना.अपनी रचनाओं के लिए कुछ सम्मान पत्र भी हासिल किये हैं . २. बच्चों  की कहानियां और कविताएँ लिखने में भी रूचि है ,कुछ कवितायेँ बच्चों की पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुई  हैं. ३. मेरी कुछ  पुस्तकें जैसे - आधी आबादी का सच ,प्रेमाभिव्यक्ति काव्य संग्रह ,अंजुरी ,अनुगूंज ,हिंदी साहित्य के आईने में स्त्री विमर्श {निबंध संग्रह}  सांझा प्रयास में छप  चुकी हैं . कुछ पुस्तकें  प्रकाशित होने वाली हैं . मेरी प्रिय काव्य की पंक्तियाँ हैं ----- "गहन सघन मनमोहक वन तरु, मुझको आज बुलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैंने, याद मुझे वो आते हैं अभी कहाँ आराम मुझे  ,यह मूक निमंत्रण छलना है अरे ,अभी तो मीलों मुझको , मीलों मुझको चलना"। Robert Frost translated  by Harivansh Rai Bachchan. मंजुल भटनागर मुंबई दिनांक २८ अक्टूबर ०९८९२६०११०५ manjuldbh@gmail.com


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