प्रेम एस गुर्जर
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

''जीवन का सबसे मुश्किल किंतु सबसे महत्वपूर्ण कार्य है अपनी सृजनात्मकता को पहचानना।'' - प्रेम एस गुर्जर लेखक परिचय:- नाम:- प्रेम एस गुर्जर जन्म:- 06 अप्रैल, 1985 स्थान:- उदयपुर, राजस्थान शिक्षा:- एम.ए. (हिन्दी साहित्य, इतिहास एवं राजनीति विज्ञान) नेट उतीर्ण - हिन्दी एवं इतिहास में सेट/स्लेट उतीर्ण - हिन्दी बी.एड., बी.ए. संप्रति:- राजस्थान शिक्षा विभाग में प्राध्यापक पद पर कार्यरत। सम्पर्क:- मो./ वाट्सअप नंबर - 9829163272 साहित्य सृजन:- उपन्यास - फिलॉसॉफर्स स्टोन - पहला उपन्यास ‘फिलॉसॉफर्स स्टोन’  हिन्दी के बेस्ट सेलर पब्लिकेशन ‘हिन्दयुग्म’ (नई दिल्ली) से 20 जुलाई 2018 को प्रकाशित हुआ। प्रकाशित होनेे के दो माह में ही यह नाॅवेल अमेज़ान की बेस्ट सेलर सूची में शामिल हो गया।  इस नाॅवेल में सामान्य इंसान द्वारा सपने देखने व उन्हें पूरे करने की कहानी है। जब इंसान सपने देखता है एवं उसे पूरा करने में जुट जाता है तो युनिवर्स की कई अदृश्य शक्तियाँ उसको सफल बनाने में लग जाती हैं। ‘‘हम वह सब कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं।’’  ये नाॅवेल आप अमेज़ान पर - Prem S Gurjar या Philosophers Stone in hindi लिखकर अपने घर मंगवा सकते हैं। कहानी :- रहस्य :- अभी तक यह कहानी कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है; जैसे वेबदुनिया, साहित्य कुंज, साहित्य मंजरी, साहित्य सुधा, प्रतिलिपि आदि पर प्रकाशित हुई है। इंसान की इंसानियत :- यह लेखक की दूसरी कहानी है। साहित्य मंंजरी पर प्ररकाशित समकालिन हिन्दी की टाॅप-5 पाॅपुलर रचनाओं में स्थान बनाया। हंस (शीघ्र प्रकाशित होने वाली), एक और अंतरीप, चौराहा, साहित्य मंजरी, साहित्य कुंज आदि पर प्रकाशित।   यह एक भावनात्मक कहानी है जिसमें इंसान की कृतध्नता का अद्भुत वर्णन किया गया है। बहादुर :- यह कहानी लिखते ही काफी पाॅपुलर हो चुकी है। अभी तक कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। जानवराधिकार :- दैनिक भास्कर एवं राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ नेे इसे युवा साहित्यकार खोज़ प्रतियोगिता मेंं कथा विधा में दूसरा स्थान दिया।  यह कहानी अभी तक किसी पत्रिका में या सोशल मीडिया पर प्रकाशित नहीं हुई है।  कविताएँ कुछ कविताएँ लिखी जैसे - जरा सा बहक जाना चाहता हूँ आदि; इनका प्रकाशन समसामयिक पत्र-पत्रिकाओं में हुआ; स्वतंत्र कविता संग्रह व कहानी संग्रह प्रकाशित नही हुए। 


वीणा वत्सल सिंह

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