प्रीती वर्मा
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

न खुदी से न खुद से शिकवा है, अपना तो हर रंग औरों से जुदा है।। हम ढ़ूंढ़ लेते है अंधेरों मे भी सूरज अपना, हमे औरों से क्या अपनी अलग ही फिजा है।। Shyaampreet❤️


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