प्रभु दयाल मंढइया
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

एम . ए . ,पी . एच्. डी .; डी लिट् , सेवा निवृत बैंक प्रबंधक ,साहित्य लेखन में रूचि . कुछ पुस्तकें प्रकाशित . गोदान के बाद(१९९४) , ( १९३६ से १९४८ तक सव. मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान का विस्तार )तथा उनके अपूर्ण "मंगलसूत्र " को पूरा करके " मंगल सूत्र का वरदान " शीर्षक से 08 मार्च,2018 को प्रतिलिपि पर पोस्ट किया है,देश के विभिन्न पत्रों / पत्रिकाओं मैं कहानी ,लघुकथा ,कविता,नाटक आदि का प्रकाशन तथा ,आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रशारण .


M@n6i "माँगी"

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