प्रज्ञा"अस्मि" अग्रवाल
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

नमस्कार, मेरा परिचित मुझे एक बैंकर के रूप में जानते हैं । दिल से ज्यादा दिमागी फैसलो को अहमियत देने वाले इस proffesion, भागदौड़ भरी जिंदगी में जैसे ही फ़ुरसत के कुछ लम्हे मिलते है, दिमाग सो जाता है और दिल को मिल्कियत मिलते ही कलम लिखने लग जाती है जिंदगी के अहसासो को, अरमानो को, न पूरे होने वाले ख्वाबो को, घुटन भरी जिंदगी मे खुले आकाश मे उड़ने की तमन्ना , दिल को लिखने पर मजबूर कर देती है । मैं कोई बहुत बड़ी लेखिका या कवियत्री नही बनना चाहती । बस लिखना चाहती हूँ । लिखने का शौक तो किसी को भी हो सकता है , परन्तु उसे कोई पढ़ने वाला न हो तो कोई मायने नही । यही एक जरूरत मुझे प्रतिलिपि के मंच पर खींच लायी है , इस उम्मीद के साथ कि आप अपने अमूल्य समय मे से थोड़ा सा वक्त मुझे पड़ने के लिए जरूर निकालेंगे । मैँ कोई बहुत अच्छा नही लिखती हूँ, फिर भी आप मुझे पढकर मेरी होउस्लाअफसाई करेंगे , एक अच्छे आलोचक बनकर मेरी रचनाओ को श्रेष्टम के शिखर पर पहुचाने मे मेरी मदद करेंगे . आपकी प्रज्ञा "अस्मि"  


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