पूनम कांत
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

मैं खुद को पानी की तरह समझती हूँ !!! पानी को जिस बर्तन में डाल दो वो उसीका आकार ग्रहण कर लेता है। मैं जब बच्चों के साथ रहती हूँ एकदम बच्ची बन जाती हूँ, हमउम्र के साथ जिंदादिली की खुशबू आती है, बुजुर्गों के संग बैठकर बड़ी-बड़ी अनुभवी बातों से भी परहेज नहीं !!!😊


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