दीपेश जैरिया
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

टूटे हुए दिल में, कुछ जज्बात रखता हूँ, गरीब आदमी हूँ साहब, इतनी ही औकात रखता हूँ!


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