दीपक जी सूरज
प्रकाशित साहित्य
53
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52,326
पसंद संख्या
4,597

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

एक लेखक के ज़िन्दगी में शब्दों के सिवा और कोई कारगर माध्यम नहीं होता अपने मन के असीम विचारों को संसार में लाने का अर्थात वह विचारों को शब्दों में पंक्तिबद्ध करके नए कहानियों को सृजित करता है साथ हीं वर्तमान में घटित घटनाओं को अप्रत्यक्ष तरीके से समाज में प्रस्तुत करता हैi एक लेखक होना एक गौरव है तो इसमें ज़िम्मेदारियाँ भी हैं i मुझे ख़ुशी है कि माँ सरस्वती का आशीर्वाद मुझपर हैi अपने बारे में स्वयं बताना गलत होगा, फिर भी मेरे बारे में इतना हीं कहूंगा कि मेरी कला में बाल्यकाल से रूचि, हिंदी से गहरा लगाव.... मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में सर्वाधिक रूचि हैi और जीवन से जुड़ी कहानियों को लिखना मुझे अच्छा लगता हैi


सोनाली चंदनशिवे

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