डॉ० श्वेता गर्ग
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

कभी फ़ूलों की तरह मत जीना.... जिस दिन खिलोगे बिखर जाओगे... जीना है तो पत्थर की तरह जियो.. जिस दिन तराशे गए ख़ुदा हो जाओगे...।


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