जयप्रकाश पवार
प्रकाशित साहित्य
299
पाठक संख्या
1,262,906
पसंद संख्या
0

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

मैं पेशेवर लेखक न होकर लेखन की वृहत पाठशाला का एक छोटा-सा विद्यार्थी हूँ। अपने व अपने परिवार के जीवनयापन के लिए एक पेशे को नियमित रूप से अपना अधिकांश समय देना पड़ता हैं, जिसमें मेरी लगभग नब्बे प्रतिशत मानसिक ऊर्जा खर्च हो जाती हैं। इस वजह से अपनी रचनाओं में उच्च कोटि की साहित्यिक गुणवत्ता लाने का मेरे पास न तो पर्याप्त समय हैं और न पर्याप्त ऊर्जा हैं, इसलिए साथी लेखकगण व सम्मानीय पाठकगण से विनम्र अनुरोध हैं कि मेरी रचनाओं को उच्च साहित्यिक कसौटी पर न परखें, अपितु केवल मनोरंजन के उद्देश्य से पढें। रचनाओं में कोई त्रुटि या कमी नजर आए तो जरूर बताने का अनुग्रह करें। मेरी रचनाओं की आलोचनाओं से भी मुझे कोई दिक्कत नहीं हैं, पर जिन्हें मेरी लेखन-शैली ही पसंद न आएँ, उनसे विनम्र अनुरोध हैं कि मुझे लेखन-शैली बदलने या इसमें निखार लाने का सुझाव देकर अपना अमूल्य समय नष्ट न करें, अपितु अपने मनपसंद लेखन-शैली के लेखक खोजकर उनकी रचनाएँ पढ़े, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में मेरे लिए अपनी लेखन-शैली में बदलाव लाना या सुधार करना मेरे लिए सम्भव नहीं हैं। हर सकारात्मक परिवर्तन की बयार या ऐतिहासिक क्रांति की शुरुआत लेखनी से ही पैदा होती हैं, इस अवधारणा में अटूट विश्वास होने के कारण समय-समय पर समसामयिक लेख लिखता हूँ और साधारण मानवीय शक्तियों व क्षमताओं के साथ विपरीत परिस्थितियों में अपने आदर्शों व सिध्दांतों पर अडिग रहकर असामान्य संघर्ष करके अपनी मंजिल पा लेने वाले लोगों की दास्तान लिखना काफी पसंद हैं। अपनी लेखनी को किसी भी पारम्परिक लेखन-शैली के दायरे में रखकर लिखने में असुविधा होती हैं, इसलिए अपनी उन्मुक्त शैली में लिखता हूँ। आम लोगों की भाषा-शैली में रचनाएँ लिखने का आदी होने की वजह से अपनी रचनाओं में हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी व उर्दू शब्दों का भी बेझिझक प्रयोग करता हूँ। गद्य विधाओं की लेखन क्षमता नैसर्गिक हैं और पद्य लेखन क्षमता मैंने अपने अंदर विकसित हैं। कोई पैसे खर्च करके मेरी रचनाएँ पढ़ें और पसन्द न आने पर खुद को ठगा हुआ महसूस न करें, ये सोचकर अपनी रचनाएँ किसी पब्लिसिंग हॉउस से पब्लिस कराकर या ई-बूक्स बनाकर विक्रय करने की कोशिश नहीं की और निःशुल्क उपलब्ध करा रहा हूँ। मेरे पेन नाम 'द स्ट्रेंजर' के अनुसार मेरी रचनाएँ काफी स्ट्रेंज होती हैं और इन्हें पढ़कर किसी पाठक को अपना मूल्यवान समय नष्ट करने के लिए अफसोस हो सकता हैं (ऐसा कमेन्ट्स बॉक्स में दो या तीन पाठक लिख चुके हैं), इसलिए सिर्फ वही पाठक पढ़ें, जिन्हें नापसंद रचनाओं में भी कुछ सकारात्मक खोज लेने की आदत हैं। मैं कभी किसी की रचनाओं की नकल नहीं करता हूँ। कोई ऐसी पौराणिक कहानी या लोककथाएँ जिनका कॉपीराइट किसी के पास नहीं होता हैं, उनमें सुनी-सुनाई या पढ़ी हुई होने का नोट लगाकर लिखने के अलावा बाकी सारी रचनाएँ मेरी स्वरचित मौलिक रचनाएँ हैं, पर रचनाओं के महासागर में किसी पूर्व या समकालीन रचनाकार की रचनाओं, टीवी सीरियल्स या फिल्मी कहानियों से मेल खा सकती हैं, क्योंकि मैंने अपनी पाठ्यपुस्तकों में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त रूसी लेखक अंतोन चेखव, भारतीय लेखक मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, हरिशंकर परसाई, अमृता प्रीतम जैसे कुछ गिने-चुने लेखकों की चंद चुनिंदा रचनाएँ ही पृथक से पढ़ी हैं और ज्यादा सीरियल्स एवं फिल्में भी नहीं देखी हैं, इसलिए यदि संयोगवश मेरी कोई रचना से किसी अन्य रचनाओं, टीवी सीरियल्स या फिल्मों की कहानियों से हू-ब-हू मैच होने का तथ्य किसी को नजर आ जाए तो मुझे जरूर अवगत करवाएँ, ताकि मैं उनमें पर्याप्त परिवर्तन करके अपनी रचनाओं को किसी की रचना की नकल होने के आरोप से मुक्त करा सकूँ। अपना अमूल्य समय खर्च करके मेरा bio पढ़नेवाले सभी पाठकों का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद।


neetu singh

631 फ़ॉलोअर्स

Meera Sajwan "मानवी"

297 फ़ॉलोअर्स

Saxena Ratna

0 फ़ॉलोअर्स

Heeral Mishra "Lucky"

17 फ़ॉलोअर्स

Imbibe knowledge

4 फ़ॉलोअर्स
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.