कुसुमाकर दुबे
प्रकाशित साहित्य
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

स्वान्तः सुखाय रघुनाथ गाथा। यही मेरा ध्येय है।जब इच्छा हुई।कल्पना ने उड़ान भरी और लेखनी शुरु।लिखना तभी संपन्न होता है जब रचना पूर्ण हो जाये।घंटा भर या दो-तीन घंटे लगातार।


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