कुणाल ठाकुर
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

दोस्तों मेरी जिंदगी एक खुली किताब जैसी है, जब चीजों को सहेजना चाहता था तब मेरी हाँथ से फिसलता चला गया। अब खुद को वक़्त के वहाव पर छोर रखा है, आखिर कहीं तो कोई किनारा मिलेगा।


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