प्रवीण कुमार गुमनाम
प्रकाशित साहित्य
22
पाठक संख्या
16,999
पसंद संख्या
0

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

काव्य ,भजन ,गीत ,गज़लें ,लेख ,कवितायें ,शायरी , लघुकथायें ,कहानी ,नाटक ,उपन्यास ,आत्मकथा ,डायरी ,एवं संस्कृत श्लोक लेखन ...... न जाने कवियों की भीड़ में मेरा प्रिय कहॉ खो गया , जो मेरे साथ होकर भी मुझसे दूर हो गया , दिन रात में अनजानी गलियों में बेगाने शहरों में उसको तलाशता हूँ मगर अब तक उससे दीदार न हुआ कैसे उसका दिल मिलने को बेकरार न हुआ फासले इतने भी क्यों ओ जालिम जो मेरी आग़ोश में गिरफ़तार न हुआ तेरे बिना मेरा वजूद ही क्या है शायद मिले भी तो साथ निभाने को तैयार न हुआ कितने मधुमास बीत गये प्रिय की तलाश में हमने तो बफ़ाये की ओ बेबफ़ा पर लगता है तुमने भुला दिया भुलाना ही था तो दिया ही क्यों ये नाम सितारों की महफ़िल में बदनाम हो गये लोग तो आफ़ताब कभी महताब समझने लगते मगर हम नाम लिखकर भी गुमनाम हो गये ।। ©® प्रवीण कुमार गुमनाम


Vijaykant Verma

3,309 फ़ॉलोअर्स

मंजीत कुमार ""मन""

1,038 फ़ॉलोअर्स

Vidya Sharma

1,975 फ़ॉलोअर्स

Mehtab Khan

272 फ़ॉलोअर्स

nidhinagar

27 फ़ॉलोअर्स

Puja Thakur

412 फ़ॉलोअर्स
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.