ओमांश
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परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

सफर यहीं कहीं कहानियों और कविताओं के आस पास मंडराता है मेरा। रास्ते के कांटे दिमाग में चुभकर मेरे जहन में उतरते हैं और शब्दों की शक्ल अख्तियार कर लेते हैं। सीखने का क्रम जारी है, फिलहाल शुरुआत की जा रही है।


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