आकांक्षा शिवहरे
प्रकाशित साहित्य
46
पाठक संख्या
54,058
पसंद संख्या
0

परिचय  

प्रतिलिपि के साथ:    

सारांश:

मैंने शब्दो की माला में, जज़्बातों को पिरोना सीखा है.. पर कभी कभी ये शब्द जितने बिखरते है, उतना ही दिल तक पहुँचते है....


Amrin Khan

3 फ़ॉलोअर्स

rohan shivhare

2 फ़ॉलोअर्स

aashna nashine

3 फ़ॉलोअर्स

Jaya Sarwan

38 फ़ॉलोअर्स

aggarwal amit

1 फ़ॉलोअर्स

Neha Kumari

3 फ़ॉलोअर्स
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.