"y" – क्यों

संजना तिवारी

(106)
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सारांश

कई दिनो बाद आज भीनी-भीनी सी धूप खिली थी और ठंडी हवाओं का ज़ोर भी कुछ कम था । इंस्पेक्टर आशीष से मिलने का इरादा करके मैं गोलघर थाने जा पहुँचा । "गुड मॉर्निंग इंस्पेक्टर आशीष " "अरे गुप्ता जी , आइये भई ...
Ajay
agar ye sach h to bahut bura h ye darindgi h
सोनम त्रिवेदी
शायद ये सच्ची घटना लिखी है आपने क्योंकि इससे एकदम मिलता हुआ केस मैंने न्यूज़पेपर में पढ़ा था। मन बहुत दुखी था उक्त घटना को पढ़ कर और साथ ही बहुत गुस्सा भी था उस जानवर के ऊपर जिसने भी ये किया था।आज फिर से वो ताज़ा हो गई
Santosh Bastiya
शब्द नही है तारीफ के, बहुत बढ़िया। कृपया मेरी रचना 'अंधेरो के साये' जरूर पढ़ें ।और अपना मूल्यवान समीक्षा जरूर दें।
Priyanka Yadav
hamare samaj ki kroor sachhaai
बृजभूषण खरे
शानदार प्रस्तुति. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
Pushpa Sharma
very bad kya such me base hota h?
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