दिल्ली का धोबी

नीरज नीर

दिल्ली का धोबी
(105)
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सारांश

गांव के बीचोबीच एक बड़ा सा हवेलीनुमा मकान था, जिसकी गिरती हुई स्थिति से उसके मालिक शिबो बाबू की स्थिति का भी अंदाजा सहज ही लग जाता था. हवेली का पश्चिमी हिस्सा पूरी तरह से गिर चुका था. गिरे हुए हिस्से ...
Rajendra Shaw
अति सुन्दर
Atamjitlal Malhotra
समयानुसार ढल जाने से ही व्यक्ति प्रगति करता है ।
आशा सिंह
गिरती हुई दीवारों में पलस्तर लग गया।बहुत सुंदर
Arvind Pratap Rathore
बहुत बढिया।सामयिक भी।और रचनाओं की अपेक्षा।
umrao singh
बहुत अच्छी कहानी।
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Kamlesh Patni
कर्म ही पूजा है।कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता ।
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