kadwahaat

Suhaas Mani

kadwahaat
(48)
पाठक संख्या − 3011
पढ़िए

सारांश

अब रोज़ सुबह उठने का कोई कारण समझ नहीं आता..जब तक नौकरी थी कुछ समय बीत जाता था बच्चों की मुस्कान देख के पर अब पूरा दिन... किस तरीके से समय व्यतीत करूँ कुछ समझ नहीं आता.. हालांकि बच्चों ने अपनी ...
Aakansha Rai
Wonderful my friend.. you’re poem ooze of perfection.. deep and lovely poem.
रिप्लाय
Farida ahmad
bahut hi badhiya Likha hai Aapne,kash bachche maa baap ke akelepan ko samajh sake
Geeta (Garima) Pandey
सही लिखा है आपने, आज के बच्चों की कड़वी सोच।
Manisha Raghav
अति उत्तम
Runa Agarwal
padhkar ek ankahi peeda ka ehsaas hua h.
Prashant
Bahut Bariya Suhaas Bhai.
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.