Flat no. L-224 ( Part - 3 )

Yakoob Khan

Flat no. L-224 ( Part - 3 )
(9)
पाठक संख्या − 477
पढ़िए

सारांश

वो मेरे जिस्म से खेल रही थी। वो मेरे जिस्म से कब तक खेलती रही मुझे नहीं पता। मुझे होश तब आया जब मेरी नींद खुली। मैंनें ख़ुद को देखा मैं वस्त्र विहीन था।
रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.