2070

नीतू सिंह 'रेणुका'

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सारांश

जिस डर, दर्द, परेशानी से औरतों को रोज़ गुज़रना पड़ता है, उससे अगर पुरुषों को गुज़रना पड़े तो हमारे समाज की तस्वीर कैसी हो?
Neelam Verma
Hahaha kash apni life me mai ye najaara dekhun. Nirbhya aur gudiya ko shraddhanjali hogi ye
Devender kumar
Kya ghjb likha h Renuji aapne. Kash aisa ho. we love gundi gang
मनीष सिन्हा
भविष्य में सायद ऐसा ही हो..
Taani Rounav
may be this is our future
Dheerendra Kumar
Good but not too much surprise element. Good fiction
alka
maja aa gya padh kr..bht khoob..me apni zindgi me ye di dekhna chahti hu..
दीपक त्यागी
बाप रे , सोचने पर मजबूर कर देने वाली कहानी। इस तरह से सोचकर कहानी लिखना आसान नहीं । धन्यवाद की पात्र हैं कहानीकार
Hirak Hirak Patowary
nothing better than this.
Govind Kumar
वाह बेहद खुबसूरत
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