17 रानडे रोड‌

रवींद्र कालिया

17 रानडे रोड‌
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सारांश

अतिथि पात्र एक : सुदर्शन पुरुषार्थीउसका नाम सुदर्शन पुरुषार्थी था, स्टेशन डायरेक्टर भटनागर उसका नाम आने पर उसे सुदर्शन शरणार्थी कहता था। भटनागर रोज़ ग्यारह बजे मीटिंग लेता था, पुरुषार्थी ग्यारह बजे सो
Lalchand Gupta
अच्छा लगा। पूरे उपन्यास में कालिया जी का अन्दाज ही प्रभावशाली रहा। एकदम आसपास के चरित्र और घटनाओं का यथार्थ चित्रण। किसी विचारधारा और वाद से परे सब कुछ सरल और सुन्दर ढंग से चित्रित।
Sunita rawat
सदा असफलताओ के बीच से भी उठ कर खड़े होने के जज्बे से ओतप्रोत हैं ये उपन्यास
ajay
पहली बार मैंने बिना पेज छोड़े पढ़ा।पर आपके नाम के आगे यह नॉवल अधूरा और बेमन से लिखा लगता है
Ashok Gupta
जिंदगी के सभी मौसम को अपनाती ,बलखाती कहानी!!! अद्वितीय
Navin Kandpal
बहुत सुन्दर ।
Umesh Yadav
दिल खुश हो गया ऐसा लगा जैसे कोई गद्यसंकलन पढ रहा हू कोई साहित्य धन्यवाद सर ऐसा लेख पढ कर मन प्रसंन्न हुआ
haider tanveer
uunt adhura h shuru se behtreen or dilchsp tha mgr uunt itna bhav heen
वीरेन्द्र कुमार
बाहत उम्दा आज काफी दिनों के बाद आप के इस उपन्यास को तल्लीनता से पढ़ा
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