…. पर पाजेप न भीगे

सत्यनारायण पटेल

…. पर पाजेप न भीगे
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सारांश

एक क़िस्सा है। और क़िस्सा क्या… ? हक़ीक़त है जी…! कल की हक़ीक़त आज क़िस्सा है। आज की हक़ीक़त कल क़िस्सा होगी। तो क़िस्सा उन दिनों का है, जब अब जैसे देश नहीं हुआ करते थे। तब देश का मतलब-एक क्षेत्र हुआ करता था। ...
शुभा शर्मा
अच्छी कहानी ।जिसमे प्यार भी है,विश्वास भी है।
Santosh Bastiya
शब्द नही है तारीफ के, बहुत बढ़िया। कृपया मेरी रचना 'अंधेरो के साये' जरूर पढ़ें ।और अपना मूल्यवान समीक्षा जरूर दें।
seema yadav
really interesting story
રામ ગઢવી
amazing story. lovely plot. congratulations
mahesh sharma
बहुत अच्छी मार्मिक कहानी
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