‘प’ से पापा

उद्भ्रांत

‘प’ से पापा
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सारांश

ये जो पिंजड़े में लटका हुआ दिन भर ‘राम कहो, राम कहो’ रटता रहता है न? आंटी की नाक बिलकुल इसी सुग्गे की नाक जैसी है। लंबी.लबी, नुकीली.नुकीली। पप्पू जाने कैसी गोलियों से खेला करता है-गोल.गोल, ...
Davinder Kumar
सुंदर कहानी उत्तम
गरिमा बरनवाल
अति उत्तम,क्या कमाल की लेखनी है आपकी
hindi@pratilipi.com
080 41710149
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