‘प’ से पापा

उद्भ्रांत

‘प’ से पापा
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सारांश

ये जो पिंजड़े में लटका हुआ दिन भर ‘राम कहो, राम कहो’ रटता रहता है न? आंटी की नाक बिलकुल इसी सुग्गे की नाक जैसी है। लंबी.लबी, नुकीली.नुकीली। पप्पू जाने कैसी गोलियों से खेला करता है-गोल.गोल, ...
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