१५ मिनट की यादें

अनिमेष तिवारी

१५ मिनट की यादें
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सारांश

कभी कभी किसी चौराहे पर खड़े होकर भी दुनिया भर के अनुभव मिल जाते हैं , पेश है एक ऐसा ही अनुभव .
abhishek
apki rachna padh kar yun lga jaise mere samne hi sab kuch chal rha ho... behatreen.
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