ज़ून, ज़ाफरान और चांद की रात

जयश्री रॉय

ज़ून, ज़ाफरान और चांद की रात
(61)
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सारांश

''चे कम्यू सोनि म्यानि ब्रम दिथ न्यू नखो चे क्योहोज़ि गयो म्यान्य दुय।'' (मेरी कौन सौतन तुझे भरमा कर ले गयी। क्यों खिन्न हुए मुझसे तुम मीत मेरे ) ... धूप में चमकते बैंजनी फूलों से एक आवाज़ अनायास तितली ...
Sjl Patel
story👌👌👌👌👌
Amit Kumar
very nice story maja aa Gaya
Shivani Tushar
शब्द नहीं मिलते मुझे अक्सर लेखकों की प्रसंशा में बस ऐसा लगा की मैं खुद भी कहानी के पात्रों के साथ चली जा रही ..👏👏
Charu Tripathi
dil ko choo gai aapki kahani 👏👏👏👏
Manoj kumar dass
bohot accha likhte ho....👌
Sadhana Saini
बेहद खूबसूरत !!
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