है बातें बहुत सी, कहूँ कैसे

विवेक कुमार शुक्ला

है बातें बहुत सी, कहूँ कैसे
(15)
पाठक संख्या − 374
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सारांश

किसी ऊँचाई पर पहुचने के बाद एक इंसान खुद को अकेला पाता है, फिर वो औरों से क्या कहता है, वही इस कविता में दिखाने की कोशिश की है मैने, आप से अनुरोध है कि बताएं मेरी कोशिश कैसी रही ।
Vinay Anand
अनुपम
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Gayatri Kharate
nice nd osm
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गोपाल यादव
शानदार रचना
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Akhil Pandey
Jbrdast sir ji pura dard udhel diya hai
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Aditya Pratap Singh
बेहतरीन पोस्ट जी
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madhu singh
Awesm poetry .....one of the best👍👍
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Abhishek kumar
jabardast... prayas jari rakhen... nikhar ayegi!! 👍👌
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रवि रंजन गोस्वामी
ह्रदय उड़ेल दिया है कविता में । स्पर्श करती है ।
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Abhishek kumar Singh
Nice
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