हेरोइन, बनु क्या

Pragya Verma

हेरोइन, बनु क्या
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पाठक संख्या − 38
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सारांश

छह साल की बेटी की ख्वाहिश
पवनेश मिश्रा
क्यों न हीरोइन बन जाऊं, भारतीय गृहणी के अथक परिश्रम, प्रयासों, और ह्रदयस्पर्शी, संवेदनशील विचारों के साथ बच्चों की बड़ी बड़ी बातें बहुत बेहतर प्रज्ञा जी, श्रीमान जी के लिए अच्छी चाय ने मुस्कराने पर मजबूर कर दिया, अनंत शुभकामनाएं 🙏😊,
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संतोष अडपावार
बहुत बढ़िया जी,गृहिणी के कार्यों का मार्मिक चित्रण किया आपने ।
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Dr.pankaj Shukla
behtreen
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NEHA SHARMA
chote man ki badi ichhaye...nice story
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