हिप्नोटाइज

विजय कुमार बोहरा

हिप्नोटाइज
(60)
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सारांश

किशोर कुमार का एक दर्दभरा अफसाना अंधेरी रात के सन्नाटे के तोडते हुए अपना साम्राज्य फैलाने को आतुर था। लडखडाते कदम, मंजिल की परवाह किये बगैर जिधर को नसों में समाया हुआ नशा ले जाये, उधर ही चले जा रहे थे। गिरते - पडते किसी तरह वह साया एक घर में दाखिल हुआ। " आ गये ? " - घर के दरवाजे पर ही खडे अपने जवान बेटे के इंतज़ार में रातों की नींद को नकारते चिंतातुर मिस्टर पंकज जडेजा ने पूछा।
संवर्त हर्षित
बड़ी अच्छी जा रही है कहानी भाई, आखिर में आपने जो ट्विस्ट डाला वो पकड़ने का कोई सोच भी नहीं सकता। अमर झूठा है या उसके दोस्त, ये जानने के लिए अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी।
संध्या रघुवंशी
Kitni slow speed se story aage badh rhi hai,kb se wait KR rhe next part,plz jldi publish kren next part ko
Manju Makkar
interesting next patt
Padmini saini
बहोत बढ़िया
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नंदिनी सिंह
अगले भाग का इंतजार
Rishabh Shukla
behtreen
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Jatin Kant Singh
interesting story
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