हिप्नोटाइज

विजय कुमार बोहरा

हिप्नोटाइज
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सारांश

किशोर कुमार का एक दर्दभरा अफसाना अंधेरी रात के सन्नाटे के तोडते हुए अपना साम्राज्य फैलाने को आतुर था। लडखडाते कदम, मंजिल की परवाह किये बगैर जिधर को नसों में समाया हुआ नशा ले जाये, उधर ही चले जा रहे थे। गिरते - पडते किसी तरह वह साया एक घर में दाखिल हुआ। " आ गये ? " - घर के दरवाजे पर ही खडे अपने जवान बेटे के इंतज़ार में रातों की नींद को नकारते चिंतातुर मिस्टर पंकज जडेजा ने पूछा।
Nandini Singh
अगले भाग का इंतजार
Rishabh Shukla
behtreen
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Jatin Kant Singh
interesting story
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Asmi Srivastava
very interesting story... plz publish the next parts..
Nikhil Sharma
very nice story please next part jaldi upload kre
Vibhor Gaur
waiting for 2nd part
Nitin Jaktia
सभी भाग लिखकर कहानी आधी
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bablendra sharma
अगला पार्ट शीघ्र प्रकाशित करें।
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