हिंदी में क्‍यों लिखूं?

प्रेमपाल शर्मा

हिंदी में क्‍यों लिखूं?
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सारांश

बाकी भाषाओं का तो वे जाने हिन्‍दी के लेखकों के साथ तो मुझे लगता है ऐसी स्थिति आ ही गई होगी जो मेरे साथ है। कहानियों की कोई कमी नहीं है। जल में तैरती ,भागती मछलियों की तरह। अनगिनत। ठीक वैसे जैसे जहां ...
Sanjay Mishra
हिंदी के वर्णविन्यास कई जगहों पर गलत हैं। प्रकाशन के पहले समीक्षा भी कर लें।
ANKUR SHUKLA
बात तो सही है
बृजभूषण खरे
लेखनी का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है.
Bhatt Vandana
सिर्फ हिंदी ही नही सभी भाषा का यही हाल है , इंग्लिश के अलावा कुछ पढा नही जाता । नमस्कार ।
डॉ.प्रतिभा प्रकाश
दुर्भाग्य मेरे देश का कोई हिंदी नेता न हुआ अनग्रेजो के चमचे अंग्रेजी का जामापहनागए हम खुद से पञ्चतन्त्र को भुलाते गये। उत्तम लेखन हेतु बधाई
ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा
आपने सच को बिलकुल खोलकर रख दिया है। हिन्दी की ऐसी दशा होने पर भी कुछ सिरफिरे लोग हिंदी में लिखने में मस्त हैं। चलिये उन्हीं में शामिल हो जाया जाय। कोई नहीं छापा, तो इन्टरनेट पर डाल देंगें अपने सपने को, जैसे कोई अनाथाश्रम में अपने बच्चे को छोड़ आता है।
ओमप्रकाश शर्मा
आजकल ऐसा ही हो रहा है यदि कोई बच्चा नमस्ते करता है तो माँ उसकी कलाई मरोड़ कर कहती है ठीक से बोल एयर कलाई तब छूटती है जब वह गुड़ मॉर्निंग कहता है। सुन्दर लेख।
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