हाथ ना लगा मेरे दुपट्टे को

अश्विनी सिंह

हाथ ना लगा मेरे दुपट्टे को
(14)
पाठक संख्या − 207
पढ़िए

सारांश

हाथ ना लगा मेरे दुपट्टे को ये तेरे माँ का आँचल हैं सोच कर लगाना हाथ ये मेरी जैसी हर बेटी कि इज़्ज़त का सहारा हैं दूर रह मेरे सीने से तुझ पर भी एक सीने के दूध का क़र्ज़ अभी बाक़ी हैं माँ तेरी भी हैं ...
बृजभूषण खरे
लेखनी का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है.
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.