हवा

नीतू सिंह 'रेणुका'

हवा
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सारांश

शशांक भूत-प्रेतों में विश्वास नहीं रखता। ऐसी बातें करने के लिए अपनी माँ का भी मज़ाक उड़ाया करता था। वह एक बिंदास, बेबाक, हँसमुख लड़का था। मगर उसकी हँसी उस दिन गायब हो गई जिस दिन...।
Uday Pratap Srivastava
अच्छी कहानी है, इसके आगे भी लिखें
punit kumar
बहुत अच्छी कहानी लिखती हैं आप
vansh
nice story next part bhi likhiye iska
Aashu Khan
iska next part bhi he kya. story achchi thi
Raghu Sharma
कहानी अधूरी लग रही है
Sandhya Rajput
.shok k ghr me khana nhi bnta aur maas to soch b nhi skta koi
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