हवा

नीतू सिंह 'रेणुका'

हवा
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सारांश

शशांक भूत-प्रेतों में विश्वास नहीं रखता। ऐसी बातें करने के लिए अपनी माँ का भी मज़ाक उड़ाया करता था। वह एक बिंदास, बेबाक, हँसमुख लड़का था। मगर उसकी हँसी उस दिन गायब हो गई जिस दिन...।
Sandhya Rajpot
.shok k ghr me khana nhi bnta aur maas to soch b nhi skta koi
शोभना श्रीवास्तव चित्रवंशी
मैडम , कहानी बहोत खूब लिखी है आपने। बेहद डरावनी भी है। मगर आपसे विनती है कि आप कहानी का दूसरा अंक भी अवश्य लिखें। जिसमें कहानी का नायक घर सकुशल पहुँचा भी या नहीं ये बताया जाय। और घर पर उसने अपनी माँ को ही पाया या उसी चुड़ैल को ये भी बताया जाय।
Retesh Sharma
बहुत अच्छी कहानी है
Gaurav Agrawal
story needs second part please wtite
Sofia Ali sofi
end bahot baikaar tha story ka
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